कहानी छोटी हो या बड़ी पर वह एक सिख जरूर दे जाती है। यह कहानी भी एक छोटे गांव की है । अगर कोई बुराई कर के सोच ता है कि में बच जाऊँगा वह एक सोच होती है। जब वह बुराई करता है तब से उसका बुरा समय सरू हो जाता है।यह कहानी भी वही बयान करती है।
सन्तराम नामक एक गांव था। जो एक नदी के किनारे पर हुआ करता था। गांव छोटा जरूर था। पर गांव से जो नदी सरू होती थी कोई कल्पना नही कर सकता कि वह गांव की नदी इतनी बड़ी होगी।
गांव वीरान होने से एक लेखक ने सोचा गांव में जाकर देख फिर कोई कहानी समाचारपत्र में लिख सकता हु। फिर क्या लेखक गांव में चला गया। गांव तक जाने में लेखक को कोई भी परेशानी नही हुए। पर जैसे ही गांव में गया लेखक को अजीब सा लगने लगता है। गांव में सबसे पहले उसकी नजर प्राथमिक विद्यालय पर पड़ती है। पूरा स्कूल कुछ और कहानी बयान करता है। लेखक पूरे स्कूल को बाहर से ही देख ता है। थोड़ा डर के साथ साथ वह स्कूल देखता है, पर कुछ भी नही नजर आता है।
स्कूल के सामने एक गेट दिखाई देता है। जो एक प्रा, कंपनी का होता है। लेखक ने गांव देख लिया इसे कोई नज़र नही आया। अगर गांव में कोई नही है तो प्रा, कंपनी में कौन हो सकता है। यह देख लेखक वापस आने का सोच ता है। अब गांव में आ ही गया हूं तो प्रा, कंपनी भी देख लेता हूं। यह सोच कर कंपनी में जाता है। कंपनी के गेट में जाते ही सामान्य लगता है पर दूसरी तरफ जहाँ देख ते ही लेखक की आँखे फटी ही रह जाती है। लेखक की निगाहें जितनी भी दूर देख सके बस सफेद पत्थर, जैसे कोई माईनस का काम चल रहा हो। यह देख लेखक सोच में पड़ जाता है। गेट के ठीक सामने वर्कर से लेखक पूछ ता है पर कोई भी रिप्लाय सही से नही मिलता है। लेखक को गेट के पास 2 मंजिल मकान दिखाई देता है, जो सामान्य तरीके से बना हुआ होता है। उस घर पर वापस जाते उसे दो लड़के दिखाई देते है। गेट का सहारा लेकर लेखक घर पर जाता है। उसे कोई नजर नही आता, न नीचे जानेकी कोई सीढ़ी होती है।।
दूसरे दिन शाम को लेखक दूर से देखता है कि गेट के मकान पे दो लड़के दिखाई देते है। लेखक गेट का सहारा लेकर फिर उस मकान पर चढ़ जाता है। पर वह कोई नही होता है।आखिर वह लड़के कहा चले जाते है। लेखक सोचता है कुछ समय यहाँ पर ही रुक जाता हूं। और लेखक को नींद लग जाती है। कुछ आहट होते ही नींद खुल जाती है तो सामने दो लड़के नीचे की तरफ जाते देख वह भी उस तरफ भागता है पर वहाँ सीढ़ी न ही लड़के होते है। यह कैसे हो सकता है। बस वह सोच ही रहा होता है तब एक लड़का की आवाज सुनाई देती है.................. क्या हमारे साथ हमारे घर मे चलोगे ! लेखक बोलता है, बोलता है पर निजे जाने की कोई सीढ़ी ही नही है। फ़िर आवाज सुनाई देती है........ आँखे बंद करो में तुम्हे अपने घर ले जाऊंगा। लेखक अपनी आँखें बंद करता है, उसे ऐसा लगता है कि उसे कोई दोनों कन्धा पकड़ कर सीढ़ी से नीचे की तरफ ले जाता है। लेखक का यह अनुभव उसे पहली बार हुआ कि क्या में में नींद में हु ? या कोई सपना देख रहा हु? लेखक की आँखे खोलकर देख ने की हिम्मत बिल्कुल ही नही हुए। लेखक नही चाहता था कि उसकी नीद उड़े! या दो लड़के उसे छोड़ कर चले जाय। ठीक नीचे जाते ही फिर से आवाज सुनाई दी कि अपनी आँखें खोलो............ यह नजारा देख लेखक को बिल्कुल ही विश्ववास नही हुआ कि उसके सामने दो लड़के है......... लेखक सबसे पहले अपने आप को चेक करता है की क्या में कोई सपना तो नही देख रहा हू, नींद में तो नही हु।
लड़को ने लेखक को कहा कि मेरा घर देखों गे। फिर पूरा घर लड़को ने दिखाया पर सिर्फ अँधेरा ही अँधेरा था। लेखक को ऑक्सीजन लेने में प्रॉब्लम हो रही थी।
लेखक बोला.... मुझे सास लेने में प्रॉब्लम हो रही है, यहाँ कोई खिड़की नही है। पास में ही खड़े लड़के ने खिड़की खोल दी..... लेखक को थोड़ा अच्छा लगने लगा। लेखक पास में ही टेबल लेकर खिड़की के पास बैठ गया।
जब खिड़की में देखा तो रात हो चुकी थी।लेखक ने बोला अंधेरा हो गया है। पता ही नही चला।
एक लड़के ने बोला शाम के 6 के बाद उस यह गेट में कोई भी नही रुक सकता है।
लेखक ने पूछा ........ऐसा क्यों ? बड़ा लड़का बोला.....हमे आप एक अच्छे और नेक इंसान दिखाई दिए, पहली बार आये तब आपको हम दिखाई दिए होंगे हम नही चाहते थे कि आप हमारी नजर से दूर जाओ, क्योकि अगर आप गेट के आगे चले जाते तो वापस कभी नही आते....... यह सुन लेखक सोच में पड़ गया।। आप दोनों कौन है.... बड़ालड़का बोला... सर हम दोनों भाई है! मेरा नाम सन्त है और मेरे छोटे भाई का नाम राम है। हम हमारे गांव के पहले मिस्त्री है जो यह काम सीखा था। लेखक ने अपने जोले से पेन ओर डायरी निकाली और लिखना सरू किया।
सन्त ने कहा हमने हमारी जमीन में प्राथमिक स्कूल में भी अपना योगदान दिया है। तब स्कूल बहोत छोटा था, ओर आप ने अभी देखा जरूर होगा। यह स्कूल हमारी जमीन में है। जो हमने सरकार को दान दिया। दूसरी तरफ यह घर भी हमने अपने हाथों से बनाया है। नीचे घर मे सीढ़ी है पर ऊपर घर मे न सीढ़ी है न खिड़की, न दरवाजा यह एक सीमेंट और कोक्रेट कि मजबूत बनाई 24 mm से ज्यादा मजबूत दीवार है। जिसे आसानी से क्या बोम्ब से भी नही गिराया जा सकता है। विंडो भी 10mm आगे और 10mm पीछे दोनों तरफ के बीच मे 4mm का एक विंडो रखा गया है जो बहोत ही छोटा है। जिसे आसानी से न खोला जा सकता है न ही ढूंढा जा सकता है।
यह बनने के बाद 1 साल बाद यहाँ सामने प्रा, कंपनी खोली गई, जिसमे गांव के सारे लोग रेती,कंकर पानी जैसी सप्लाय कर रहे थे। जो सरकारी है पर यहाँ प्रा. कंपनी का बोर्ड मारकर करोड़ो रुपिया की हेरा फेरी होने लगी। नदी का पानी धीरे धीरे सूखने लगा जैसे जैसे पानी सुक्ता गया उनकी लालच बढ़ ने लगी। नदी में बालू कम हो गया पर किस्मत से उसमे पत्थर निकल आये और प्रा. कंपनी ने सब अपने नाम करवा लिया जो गांव का था। हम दो भाई ही थे जो यह विरोध कर रहे थे। बाकी सब खामोश थे । एक दिन गांव और प्रा. कंपनी के बीच वर्तालाभः करने को मीटिंग रखी गई। पूरा गांव गया में भी जाने वाला था पर छोटे भाई को यह घर मे बंद कर दिया जिसे खोलना बस में और मेरा भाई जानते है। मेने मेरे भाई को यहाँ पर बंद करके जाने वाला था। तब हमने मुजे गांव के स्कूल में थोड़ा काम करना था। कुछ देर बाद जाकर मेने देखा कि वहाँ पूरा गांव लेता हुआ है। वहाँ पर पूरा गांव लेता हुआ है? क्या हुआ पत्ता नही ? पर में वहा से भाग कर वापस आ गया। और उस घर मे छिप गया। तब से में ओर मेरा भाई यही पर है।
लेखक ने पूछा.... कितने सालो से हो आप ! संत ने कहा....... तकबरीबन 2001 से बंद है। लेखक सोच में ही पड़ गया.....भला इतने साल कोई कैशे जिंदा रह सकता है। वह भी एक दम ठीक ठाक।
संत ने कहा कि फिर आप ने किसी को बताया नही। पुलिसः, या किसी और को, बताया जो भी यह जानकारी ले कर जाता वह बिक जाता या मारा जाता।
लेखक ने कहा.... आप को नुकसान पहोचने की कोशिश नही की ?
सन्त ने कहा अगर वह स्कूल या यह घर को नुकसान पहोचता है तो प्रा. कंपनी हमेशा के लिये बंद हो जाएगी।
लेखक सोच में पड़ गया... भला यह कैशे!
संत ने कहा..... अगर हम मारे जाते है तो यह जमीन ट्रस्ट में चली जायेगी जिसे यह मामला बहार आ जायेगा और यह सारा काम बंद हो जाएगा।
यह सुन लेखक बोला फिर आप दोनों भाग क्यो नही जाते....... सन्त बोला भाग ना बहोत मुश्किल था और अब ना मुन्किन है।
प्रा. कंपनी का मालिक कौन है! शायद अब वह जिंदा नही है।
लेखक....भला क्यों ? संत ...... बालकनी से थोड़ा बहार की तरफ देखो... वह नदी की ओर नजारा कुछ और ही दिख रहा था।
लेखक ये सब क्या है... आप से पहले माइंस की तरफ कोई गया था। हमने मना किया था पर माना नही ओर चला गया। आज उसकी आखरी रात है।
लेखक....यह सब कौन करता है।
संत ......गांव के लोग!
सुबह में कल आप को गांव के लोग मेसे किसीने यह कहा था कि आज अच्छा खाना मिलेगा ! शायद आप ने सुना होगा। गांव के लोग नही किसी को मारना चाहते पर पूरे2 गांव को धोखे से मारा इस लिए पूरा गांव एक साथ मिलकर इस काम को अंजाम देते है। लेखक यह सुन कर पसीना पसीना हो गया।
लेखक ने पूछा... फिर में कैसे बच गया?
संत ने कहा.... आप ने प्रा. कंपनी के अंदर जाकर देख कर बोला कि इतनी सारी जमीन को बंजर कर दिया पर यहाँ पर एक भी पेड़ नही लगाया। अब हम लगाएंगे। जब आप ये सब बोल रहे थे में सुन रहा था। आप जब माईनस की तरफ जा रहे थे में ने आप को किसी भी तरह आप का ध्यान मेरे तरफ कर लिया और गेट से बाहर आप को मेरे घर के छत पर ले आया।जिससे आप गांव के लोगों से बच गए। गांव में आप सुरक्षित हो पर 6 बजते ही गेट के अंदर से आज तक कोई भी जिंदा नही आया और न हम बचा पाए किसी को ?
छोटे भाई ने भोजन बनाया। सब ने साथ मिलकर भोजन खाया। लेखक पूरी रात भर गाव के माईनस का नजारा देख ते रहे।और कब टेबल पर बैठे बैठे नीद आ गई पत्ता ही नही चला।
सुबह होते ही जब लेखक की आँखे खुलती है तो वह नजारा देख अपने आप को सन्तराम की छत पर सोया पाते है। जल्द ही अपना जोला उठाकर मकान की छत से नीचे आते है और गांव के पुलिस के पास जाते है। और अपनी सारी बात बताते है, जिससे पुलिसः वाले मजाक ओर पागल बताकर उसे नोटिश बोर्ड पर सन्त और राम की फ़ोटो दिखाते है।
लेखक फ़ोटो देख यही दोनों मिले थे मुझसे और खाना भी खिलाया मुजे। पुलिस ने समझा यह गांव में जाकर पागल हो गया है।
लेखक को एक ट्रस्ट के पास जाकर यह बताता है कि यह बात है। ट्रस्ट के मैनेजर यह सुन के आँखे चार हो जाती है। यह बात तो वकील ही जनता और में फिर यह कैसे जनता है।
ट्रस्ट के मैनेजर को पूरी बात लेखक सुनता है। मैनेजर पुलिसः, मीडिया को लेकर गांव की तरफ जाते है। स्कूल और घर की तलासी ली जाती है। पर कुछ नही मिलता है।सब धोका ओर लेखक को पागल बताकर खरी-खोटी बाते सुनाने लगते है। तब लेखक को छत से सीढ़ी होने का दावा करता है। घर चारो तरफ से बंद होता है। लेकिन लेखक छत के कोने में जाकर आँखे बंद कर के सीढ़ी से नीचे जाने की कोशिश करता है और वाक़ेय लेखक सीढ़ी से नीचे चला जाता है। सब यह देख सोच में पड़ जाते है कि लेखक कहा चला गया। गायब हो गया।
थोड़ी देर बाद पूरा घर चारो तरफ से खुल जाता हैं। दो नो भाई की बॉडी टेबल पर बैठे हुए कंकाल के रूप में मिलती है। और यह गांव की सारी जमीन ट्रस्ट के नाम हो जाती है।
